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बहराइच हिंसा-20 गांवों से आए दंगाई, मुस्लिम घर छोड़कर भागे


भगवा झंडा लहराने वाले की बहन बोली- भाई को 15 गोलियां मारीं

‘हमारा सब कुछ बर्बाद हो गया। घर में 50 हजार रुपए रखे थे, दंगाई लूट ले गए। बच्चों के कपड़े, खाने-पीने का सामान जला दिया। हम उनके सामने गिड़गिड़ा रहे थे, लेकिन वे लोग कमरों में घुस-घुसकर आग लगाते रहे।’ बच्चों के साथ घर की दीवार से सटकर बैठीं आसमां ये बात कहते हुए रोने लगती हैं। 14 अक्टूबर को UP के बहराइच में भड़की हिंसा आसमां के गांव कबिरहन पुरवा तक भी पहुंची थी। 500 से ज्यादा उपद्रवी गांव में घुसे और घरों में आग लगा दी। हिंसा की शुरुआत बहराइच से करीब 40 किमी दूर महाराजगंज कस्बे से हुई थी। कबिरहन पुरवा गांव महराजगंज से सटा है।

करीब 6 हजार आबादी वाले महाराजगंज में 80% घर मुसलमानों के हैं। यहां दो दिन से सन्नाटा पसरा है। 13 अक्टूबर, 2024 को कस्बे में प्रतिमा विसर्जन का जुलूस निकला था। इसी दौरान सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई। जुलूस में शामिल एक युवक की मौत से माहौल और बिगड़ गया। इसके बाद से हर गली में 10-10 पुलिसवाले तैनात हैं। बाजार में जली दुकानें, शोरूम, घर और गाड़ियां दिख रही हैं।

दहशत का माहौल ऐसा है कि मुस्लिम घर छोड़कर भाग गए हैं, गेट पर ताला लगा है। कुछ घर खुले हैं, लेकिन अंदर कोई नहीं हैं। पुलिस ने आसपास के 20 गांवों की पहचान की है। शक है कि उपद्रवी इन्हीं गांवों से आए थे। दुर्गा विसर्जन का मौका अचानक कैसे मजहबी बवाल में बदल गया, इस बवाल के मुख्य चेहरे कौन हैं, हिंसा के बाद सरकार और पुलिस ने क्या एक्शन लिया है, हिंसा वाले इलाकों में अब कैसा माहौल है, ये जानने के लिए दैनिक भास्कर महाराजगंज पहुंचा।

इसी बीच देवी प्रतिमा के साथ चल रही भीड़ से निकलकर 25 साल का रामगोपाल मिश्रा एक घर की छत पर चढ़ गया। उसने छत पर लगा धार्मिक झंडा हटा दिया और भगवा झंडा लहराने लगा। इसका एक वीडियो भी सामने आया है। इसके बाद इलाके में तनाव फैल गया। लोग संभल पाते, तभी पथराव होने लगा। पत्थरबाजी में प्रतिमा टूट गई और बवाल बढ़ गया। माहौल बिगड़ने का अंदेशा होते ही महसी पुलिस चौकी इंचार्ज शिवकुमार एक्टिव हो गए। SP वृंदा शुक्ला फोर्स बुलाने के लिए फोन करने लगीं। एक घंटे के अंदर 100 से ज्यादा पुलिसवालों ने पूरा इलाका घेर लिया।

इस बीच एक घर से गोली चलने की आवाज आई। गुस्साई भीड़ घर की तरफ भागी। थोड़ी देर बाद घर से जख्मी हालत में रामगोपाल को निकाला गया। लोग उसे लेकर मेडिकल कॉलेज गए। वहां उसकी मौत हो गई।

घर की छत पर लगा धार्मिक झंडा हटाने से शुरू हुआ बवाल

महाराजगंज के बीचोबीच एक मस्जिद है। इसके सामने लोकल मार्केट है। हिंसा की शुरुआत इसी जगह से हुई थी। रविवार शाम करीब 5:30 बजे मगरिब की नमाज अदा करने के लिए लोग मस्जिद में आना शुरू हुए थे। उसी वक्त DJ का शोर होने लगा। 100 से ज्यादा लोग ट्रैक्टर पर देवी प्रतिमा लेकर विसर्जन के लिए जा रहे थे। हाथों में भगवा झंडे लिए भीड़ मस्जिद के सामने पहुंची। DJ पर चल रहे गानों की वजह से माहौल गरमा गया। बहसबाजी शुरू हो गई।

रामगोपाल दोपहर 3 बजे घर से निकला था, फिर नहीं लौटा

महाराजगंज से गुजर रहे जुलूस की शुरुआत 8 किलोमीटर दूर रेहुआ मंसूर गांव से हुई थी। गांववालों ने नवरात्रि में देवी प्रतिमा स्थापित की थी। दशहरे के अगले दिन विसर्जन की तैयारी शुरू हुई। दोपहर 4 बजे प्रतिमा को ट्रैक्टर पर रखा गया और जुलूस महाराजगंज बाजार की तरफ बढ़ा। विसर्जन घाट का रास्ता महाराजगंज कस्बे से होकर ही जाता है। रेहुआ मंसूर गांव के अभिषेक मिश्रा भी उस दिन जुलूस में थे। अभिषेक के मुताबिक, उनके सामने ही रामगोपाल को गोली मारी गई थी। वे बताते हैं, ‘हम लोग गाते-बजाते जुलूस के साथ चल रहे थे। रामगोपाल सबसे आगे था।’

अभिषेक बताते हैं, ‘जुलूस महाराजगंज में अब्दुल हमीद के घर के सामने पहुंचा। अब्दुल के घरवालों ने गाने पर आपत्ति जताई और DJ का तार खींचकर तोड़ दिया। तभी वहां उनके साथ वाले और लोग आ गए। हिंदू धर्म के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।’ तभी एक घर के अंदर से आवाज आई-

पकड़ो **** को। उन लोगों ने हमारे साथ चल रहे राजन और कृष्णा को घर के अंदर खींच लिया। रामगोपाल दूसरी तरफ भागा और एक घर की छत पर कूद गया। वहां एक झंडा लगा था। उसने झंडा तोड़ दिया और भगवा झंडा लहराने लगा।’ अभिषेक आगे कहते हैं, ‘इसी दौरान घर से कुछ लोग निकले और रामगोपाल को घसीटते हुए घर के अंदर ले गए। उसे चाकू घोंपा और फिर गोली मार दी।’


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