– रिश्तों में थोड़ी दोस्ती घोल दिया करो, जीवन सार्थक और सफल हो जाएगा : राष्ट्रसंत पुलक सागर
– नगर निगम प्रांगण में 27 दिवसीय ज्ञान गंगा महोत्सव प्रवचन श्रृंखला का 15वां दिन
उदयपुर 3 अगस्त। सर्वऋतु विलास स्थित महावीर दिगम्बर जैन मंदिर में राष्ट्रसंत आचार्यश्री पुलक सागर महाराज ससंघ का चातुर्मास भव्यता के साथ संपादित हो रहा है। रविवार को टाउन हॉल नगर निगम प्रांगण में 27 दिवसीय ज्ञान गंगा महोत्सव के 15वें दिन नगर निगम प्रांगण में विशेष प्रवचन हुए। रविवार को नगर निगम प्रांगण में सांसद मन्नालाल रावत ने आचार्य पुलक सागर महाराज के दर्शन कर आशीर्वाद लिया।

चातुर्मास समिति के अध्यक्ष विनोद फान्दोत ने बताया कि रविवार को कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व विधि आयोग, भारत सरकार आनंद पालीवाल, शहर विधायक ताराचंद जैन, सीएमएचओ शंकर बामनिया, अंबामता चिकित्सालय से प्रभारी राहुल, परम संरक्षक चैंबर ऑफ कॉमर्स शब्बीर मुस्तफा, अध्यक्ष दसा नरसिंहपुरा जैन समाज सुमति प्रकाश वालावत, उद्योगपति जयंतीलाल लुणदिया, उद्योगपति अशोक काबरा एवं सुशील जांगिड़ थे ।
चातुर्मास समिति के परम संरक्षक राजकुमार फत्तावत व मुख्य संयोजक पारस सिंघवी ने बताया कि ज्ञान गंगा महोत्सव के 15वें दिन आचार्य पुलक सागर महाराज ने कहा कदम रुक गए जब हम पहुंचे रिश्तों के बाजार में, सभी रिश्तें बिक रहे थे खुले आम बाजारों में, हमने कांपते आधरों से पूछा कि क्या भाव चल रहा है रिश्तों का ? दुकानदार ने पूछा कि कौनसा रिश्ता खरीदेंगे, बाप बेटे का रिश्ता? मैने बोला ये भी बिकता है, तो दुकानदार बोला हां आजकल के जमाने में ये भी बिकता है । मैने पूछा और कौन कौन से रिश्ते है, दुकानदार बोला, भाई बहन के भी रिश्ते बिकते है, पति पत्नी के भी रिश्ते बिकते है, मां बेटे के रिश्ते भी बिकते है, इंसानियत के रिश्ते भी बिकते है, बोलो गुरुदेव कौनसा रिश्ता खरीदना चाहते हो? हमने दुकानदार से कांपते आधरों से पूछा दोस्ती के रिश्तों का क्या भाव चल रहा है? दुकानदार ने कहा कि गुरुदेव क्षमा करना, हिंदुस्तान में हर रिश्ता बिकता है, लेकिन दोस्ती का रिश्ता कभी नहीं बिका करता है । यह रिश्ता बिकाऊ नहीं है, इसका मोल मत लगाओ गुरुदेव, क्योंकि जिस दिन इस देश में दोस्ती का रिश्ता बिक गया उस दिन इस दुनिया को उजडऩे में ज्यादा देर नहीं लगेगी ।

दोस्ती से कीमती कोई जागीर नहीं होती और दोस्ती से खूबसूरत कोई तस्वीर नहीं होती । यूं तो कच्चा धागा है दोस्ती, मगर इन धागों से मजबूत कोई जंजीर नहीं होती । हमारा देश दोस्ती के लिए जाना जाता है, दुनियां में कई देशों ने एक दूसरे देशों को जीता होगा, लेकिन हिंदुस्तान हमेशा दोस्ती से दिल जीतने के लिए जाना जाता है । कुछ रिश्ते रब बनाता है, कुछ रिश्ते हम बनाते है, कुछ रिश्ते खुद बन जाया करते है । पहली चीज यदि कोई किस्मत से मिलती है तो वह पत्नी है, दूसरा अच्छी संतान, आज्ञाकारी पुत्र पुत्री होना भी नसीब से मिला करता है और तीसरा जो सबसे नसीब से मिलता है वो है अच्छा और सच्चा दोस्त । किससे होती है दोस्ती, जिससे हमारे विचार मिलते है, और जिससे विचार नहीं मिलते यह दोस्त भी कुछ समय बाद दुश्मन हो जाया करता है ।

पत्नी 60 प्रतिशत हमे दुखों से बचाती है, लेकिन 80 प्रतिशत दुख से दोस्त बचाया करते है । दोस्त ना मिले तो जीना दुश्वार हो जाएगा । जीवन में सभी रिश्तों में दोस्ती का मिश्रण कर दो, जीवन सफल हो जाएगा । दोस्ती से बड़ा कोई रिश्ता नहीं, हर रिश्तो में थोड़ी दोस्ती घोल दिया करो, जीवन सार्थक और सफल हो जाएगा । सच्चे दोस्त कौन होते है, सच्चे दोस्त वो होते है जो तलवार की नहीं, ढाल की तरह सदैव साथ रहा करते है । दोस्त वो नहीं हो तस्वीरों में साथ देते है, दोस्त वो है जो तकलीफों में साथ दिया करते है । पंछी की तरह दोस्ती मत करना, की पानी पिया और उड़ गए, पानी है तब तक आएंगे और पानी सुख गया उसके बाद उनका आना बंद, मै पुलक सागर कहता हूं अगर दोस्ती करनी है तो मछली की तरह करो, जब तक पानी होगा तब तक वह उसी में रहती है, और जब पानी सुख जाता है तब वह अपने प्राणों को भी न्यौछावर कर देती है, लेकिन सरोवर से नाता नहीं तोड़ा करती है ।

चातुर्मास समिति के महामंत्री प्रकाश सिंघवी व प्रचार संयोजक विप्लव कुमार जैन ने बताया कि इस अवसर पर विनोद फान्दोत, राजकुमार फत्तावत, शांतिलाल भोजन, आदिश खोडनिया, पारस सिंघवी, अशोक शाह, शांतिलाल मानोत, नीलकमल अजमेरा, शांतिलाल नागदा सहित उदयपुर, डूंगरपुर, सागवाड़ा, साबला, बांसवाड़ा, ऋषभदेव, खेरवाड़ा, पाणुन्द, कुण, खेरोदा, वल्लभनगर, रुंडेडा, धरियावद, भीण्डर, कानोड़, सहित कई जगहों से हजारों श्रावक-श्राविकाएं मौजूद रहे।


